चश्मा





उसने रोशनी के बीच रातों को पिया होगा,
वो अगर ऐसे जिया तो क्या जिया होगा?

आज उसकी शक्ल पर ज़्यादा हंसी है जो,
कल उसी ने दर्द कुछ ज़्यादा लिया होगा।

अब तुझे दुनियां में बस एक रंग दिखता है,
तेरी भी आंखों में चश्मा सिल दिया होगा।

- उदय




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